रिपोर्ट न्यूज18+ब्यूरो हेड
महराजगंज निचलौल/ ठूठीबारी जनपद महराजगंज में पुलिस विभाग से जुड़े दो कथित व्हाट्सएप ऑडियो वायरल होने के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है। निचलौल थाना क्षेत्र से जुड़े एक कथित काराख़ास मनीष सिंह तथा ठूठीबारी क्षेत्र से जुड़े कथित काराख़ास मृत्युंजय तिवारी के नाम सामने आने के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। वायरल ऑडियो की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन इन ऑडियो को लेकर जिले में राजनीतिक, सामाजिक और पत्रकारिता जगत में तीखी बहस छिड़ गई है।
बताया जा रहा है कि एक वायरल ऑडियो में कथित तौर पर निचलौल थाना से जुड़े काराख़ास द्वारा थाना स्तर पर हर माह लगभग 9 लाख रुपये आने की बात कही जा रही है। वहीं दूसरे कथित ऑडियो में ठूठीबारी क्षेत्र से जुड़े काराख़ास के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि थाने में नए प्रभारी के आने पर व्यवस्थाओं और स्थानीय गतिविधियों की जिम्मेदारी काराख़ासों को ही सौंपी जाती है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
पत्रकारों में बढ़ी नाराजगी, प्रतिक्रिया न मिलने पर उठे सवाल
मामले को लेकर कुछ पत्रकारों का कहना है कि वायरल ऑडियो और कथित व्हाट्सएप कॉल से संबंधित जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से पुलिस अधीक्षक महराजगंज तक पहुंचाई गई थी, लेकिन अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया या आधिकारिक कार्रवाई सामने नहीं आई है।
इसी को लेकर पत्रकारों के एक वर्ग में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि यदि किसी पत्रकार को कथित तौर पर पुलिस विभाग से जुड़े व्यक्तियों द्वारा निशाना बनाया जाता है या उस पर दबाव बनाने की कोशिश होती है, तो मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
ट्रूकॉलर पर ‘जर्नलिस्ट’ आईडी का दावा भी चर्चा में
विवाद के बीच यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि कथित बातचीत के दौरान संबंधित व्यक्ति ने कॉल करने वाले से पूछा कि क्या वह मीडिया से जुड़ा है। जवाब में सामने वाले ने बताया कि उसके ट्रूकॉलर प्रोफाइल पर “जर्नलिस्ट” लिखा हुआ दिखाई देता है।
इस घटना के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर किसी व्यक्ति की पहचान और पेशे की जानकारी के आधार पर उससे अलग तरह का व्यवहार क्यों किया जाए। सोशल मीडिया पर लोग इस पहलू पर भी अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
‘वसूली तंत्र’ के आरोपों ने खड़े किए गंभीर प्रश्न
वायरल ऑडियो के बाद आम जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि कथित तौर पर थानों में धन उगाही या वसूली जैसी कोई व्यवस्था संचालित होती है, तो उसका लाभ किस स्तर तक पहुंचता है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक प्रमाण या जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
जनता के बीच यह चर्चा भी है कि जनसुनवाई, थाना दिवस और जनता दर्शन जैसे कार्यक्रमों में आने वाले लोगों से जुड़े मामलों में यदि कहीं अवैध लेनदेन होता है तो उसकी निगरानी कौन करता है और जवाबदेही किसकी तय होगी।
काराख़ास व्यवस्था पर फिर उठी बहस
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर पुलिस थानों में कथित रूप से सक्रिय काराख़ास व्यवस्था को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसे लोगों की भूमिका क्या है, उनकी जवाबदेही किसके प्रति है और क्या उन्हें किसी प्रकार की प्रशासनिक मान्यता प्राप्त है अथवा नहीं।
सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि वायरल ऑडियो वास्तविक हैं तो मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके। वहीं यदि ऑडियो भ्रामक या फर्जी हैं तो अफवाह फैलाने वालों के विरुद्ध भी कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
अब निगाहें पुलिस अधीक्षक पर
जनपद के लोगों की नजरें अब पुलिस अधीक्षक महराजगंज शक्ति मोहन अवस्थी पर टिकी हैं। लोगों का कहना है कि उनकी पहचान एक सख्त और सक्रिय अधिकारी के रूप में रही है, ऐसे में इस पूरे मामले में प्रशासनिक प्रतिक्रिया और संभावित जांच को लेकर उत्सुकता बनी हुई है।
वायरल ऑडियो की सत्यता, कथित वसूली के दावों और काराख़ासों की भूमिका से जुड़े तमाम सवालों का जवाब अब जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही सामने आ सकेगा। फिलहाल यह मामला जिले में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है और लोग यह जानने का इंतजार कर रहे हैं कि आरोपों की सच्चाई क्या है तथा जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है।
नोट: यह समाचार वायरल ऑडियो और सार्वजनिक चर्चाओं पर आधारित है। ऑडियो की सत्यता तथा उसमें किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर समाचार को अद्यतन किया जा सकता है।