Bureau Report /News 18 Plus /Sinduriya
महराजगंज। सिंदुरिया चिउटहां: जनपद में अवैध मादक पदार्थों के कारोबार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सदर क्षेत्र के बलुअही धुस चौराहे से लेकर मिठौरा क्षेत्र तथा भेड़िया ग्राम सभा तक अवैध गांजा बिक्री के आरोप सामने आए हैं। खोजी पत्रकारिता के तहत किए गए एक कथित स्टिंग ऑपरेशन में ऐसे दृश्य रिकॉर्ड होने का दावा किया गया है, जिनमें खुलेआम गांजा बेचे जाने का आरोप है। यदि इन दावों की निष्पक्ष जांच में पुष्टि होती है, तो यह कानून-व्यवस्था और मादक पदार्थों की रोकथाम व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न होगा।
कैमरे में कैद होने का दावा, ग्राहक बनकर पहुंची टीम
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद संवाददाता राकेश त्रिपाठी ने टीम के साथ कथित रूप से ग्राहक बनकर मौके पर पहुंचकर स्टिंग ऑपरेशन किया। दावा है कि खुफिया कैमरे में पूरा घटनाक्रम रिकॉर्ड हुआ, जिसमें एक युवक सीमेंट की बोरी में छिपाकर रखी गई गांजे की पुड़िया निकालकर ग्राहकों को देता दिखाई देता है।
स्टिंग में यह भी दावा किया गया कि गांजे की बिक्री के लिए बाकायदा तय रेट पर पुड़ियां उपलब्ध कराई जा रही थीं।
– 80 रुपये की पुड़िया
– 150 रुपये की पुड़िया
– 250 रुपये की पुड़िया
– 500 रुपये की पुड़िया
यदि यह सामग्री प्रामाणिक पाई जाती है, तो यह दर्शाता है कि अवैध कारोबार सुनियोजित तरीके से संचालित किए जाने के आरोप हैं।
खुलेआम बिक्री के आरोप, स्थानीय लोगों में नाराजगी
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सुबह से देर शाम तक क्षेत्र में नशे की पुड़ियां आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। उनका कहना है कि युवाओं को नशे की गिरफ्त में धकेलने वाला यह नेटवर्क लगातार फैल रहा है, जिससे अभिभावकों में चिंता और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
स्टिंग ऑपरेशन के दावों के सामने आने के बाद क्षेत्रीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सोशल मीडिया पर अपराध नियंत्रण के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है।
कुछ ग्रामीणों का यह भी दावा है कि पहले भी संदिग्ध व्यक्तियों के संबंध में शिकायतें और सूचनाएं सार्वजनिक की गई थीं। उनका कहना है कि यदि उन सूचनाओं के आधार पर तकनीकी जांच या अन्य कानूनी कार्रवाई की जाती, तो पूरे नेटवर्क तक पहुंचा जा सकता था। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
आबकारी विभाग की भूमिका पर भी सवाल
अवैध नशे के कारोबार के आरोपों के बीच आबकारी विभाग की कार्यशैली भी चर्चा में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियमित निरीक्षण और प्रभावी कार्रवाई होती, तो मुख्य चौराहों और गांवों में खुलेआम अवैध बिक्री संभव नहीं होती।
ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई केवल कागजी स्तर तक सीमित दिखाई देती है, जबकि जमीनी स्थिति अलग नजर आती है। इन आरोपों पर विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
भेड़िया क्षेत्र में महिला पर भी आरोप
भेड़िया ग्राम सभा क्षेत्र में नहर के सामने रहने वाली एक महिला पर भी ग्रामीणों ने अवैध गांजा बिक्री के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि उसके यहां भी तय कीमत पर गांजे की पुड़ियां उपलब्ध कराई जाती हैं। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
देशी शराब की अवैध बिक्री की भी शिकायतें
केवल गांजा ही नहीं, बल्कि देउरवा क्षेत्र में भी निर्धारित मूल्य से अधिक दाम पर देशी शराब बेचे जाने की शिकायतें स्थानीय लोगों द्वारा की जा रही हैं। लोगों का आरोप है कि इससे सरकारी व्यवस्था को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ अवैध कारोबारियों के हौसले भी बढ़ रहे हैं।
युवाओं के भविष्य पर बढ़ता खतरा
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि गांवों और कस्बों में आसानी से उपलब्ध नशा युवा पीढ़ी को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो इसके सामाजिक परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
स्थानीय लोगों का दावा है कि इससे पहले भी अवैध नशा कारोबार को लेकर कई शिकायतें और समाचार प्रकाशित हुए, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि इसी वजह से अवैध कारोबार करने वालों के हौसले लगातार बढ़ते गए।
अब निगाहें पुलिस अधीक्षक पर?
जनपद में अपराध और मादक पदार्थों के विरुद्ध अभियान लगातार चलाए जाने के दावे किए जाते हैं। ऐसे में अब लोगों की नजर पुलिस अधीक्षक पर टिकी हुई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि स्टिंग ऑपरेशन में किए गए दावों की निष्पक्ष जांच कराई जाती है, तो पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
बड़ा सवाल
यदि किसी स्टिंग ऑपरेशन में कथित रूप से अवैध कारोबार रिकॉर्ड हो सकता है, तो क्या संबंधित विभागों तक ऐसी सूचनाएं पहले नहीं पहुंची थीं?
क्या शिकायतों और स्थानीय लोगों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी?
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराते हैं या नहीं, तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाती है। वहीं, संबंधित पुलिस एवं आबकारी विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।