Bureau Report /News 18 Plus /Maharajganj
16 वर्षीय किशोरी के कथित बाल विवाह का मामला; पिता बोले—पहले भगाने के केस में नहीं हुई सख्त कार्रवाई, दूसरी बार भी थाने ने नहीं सुनी फरियाद, अब एसपी से न्याय की गुहार।
महराजगंज। जनपद में एक 16 वर्षीय किशोरी के कथित बाल विवाह का मामला सामने आने के बाद निचलौल पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। पीड़ित पिता ने आरोप लगाया है कि उसकी नाबालिग बेटी को महाराजगंज लाकर रामसजीवन, रेनू, जितेंद्र और महेश ने मिलकर जबरन विवाह करा दिया। सबसे गंभीर आरोप यह है कि बेटी के नाबालिग होने की जानकारी दिए जाने के बावजूद स्थानीय पुलिस ने समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
पीड़ित सुग्रीव विश्वकर्मा, निवासी बहरौली, थाना निचलौल के अनुसार घटना की सूचना सबसे पहले कोतवाली पुलिस को दी गई। उनका आरोप है कि कार्रवाई करने के बजाय उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया कि आरोपित निचलौल थाना क्षेत्र के हैं, इसलिए वहीं शिकायत करें। अगले दिन निचलौल थाने में भी लिखित प्रार्थना पत्र दिया गया, लेकिन वहां भी न मुकदमा दर्ज हुआ और न ही कोई ठोस कानूनी कार्रवाई की गई।
“यह दूसरी बार बेटी को भगाया गया”—परिजनों का आरोप
पीड़िता के परिजनों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। उनके अनुसार, इससे पहले भी आरोपी उनकी नाबालिग बेटी को भगा ले गया था। उस समय भी निचलौल थाने में शिकायत दी गई थी, लेकिन गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज न होने के कारण आरोपी को शीघ्र जमानत मिल गई। परिजनों का आरोप है कि यदि उसी समय कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होती तो दोबारा ऐसी घटना नहीं होती।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि दूसरी बार शिकायत देने पहुंचे तो कुछ पुलिसकर्मियों ने यह कहते हुए आवेदन लेने से ही मना कर दिया कि “दोबारा एप्लीकेशन मंजूर नहीं किया जाएगा, शांत रहो।” यदि यह आरोप सही हैं, तो यह पीड़ित की शिकायत दर्ज कराने के अधिकार और पुलिस की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
बाल विवाह और पॉक्सो कानून के उल्लंघन का दावा
प्रार्थना पत्र में किशोरी की उम्र 16 वर्ष बताई गई है। यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो मामला बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006, पॉक्सो अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत गंभीर अपराध बन सकता है।
एसपी से लगाई न्याय की गुहार
स्थानीय स्तर पर कार्रवाई न होने से निराश पीड़ित पिता ने पुलिस अधीक्षक से मिलकर दोषियों के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज कराने, बेटी को न्याय दिलाने तथा पूरे प्रकरण में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
सबसे बड़ा सवाल
यदि एक नाबालिग किशोरी के कथित बाल विवाह की शिकायत के बावजूद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? क्या जांच के बाद दोषियों के साथ-साथ शिकायत पर कार्रवाई में हुई देरी और कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होगी?
पीड़ित पक्ष द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र और लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है। मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।