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महराजगंज, 30 जुलाई 2026 विकासखंड मिठौरा सभागार में ‘प्रोजेक्ट पहचान’ के अंतर्गत 0 से 6 वर्ष आयु वर्ग के दिव्यांग एवं विकासात्मक विलंब से प्रभावित बच्चों की समय पर पहचान एवं शीघ्र हस्तक्षेप विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य ऐसे बच्चों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर उन्हें स्वास्थ्य, पुनर्वास एवं सामाजिक सुरक्षा सेवाओं से जोड़ना रहा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला विकास अधिकारी बी.एन. कन्नौजिया ने कहा कि प्रोजेक्ट पहचान का लक्ष्य दिव्यांग एवं विकासात्मक विलंब वाले बच्चों को समय रहते चिन्हित कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी के विजन के तहत इस परियोजना की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभियान की सफलता स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा विभाग और पंचायत स्तर के कर्मियों के बेहतर समन्वय पर निर्भर करेगी। साथ ही उन्होंने प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी को जमीनी स्तर पर लागू करने और प्रत्येक पात्र बच्चे तक समयबद्ध सेवाएं पहुंचाने का आह्वान किया।
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि प्रारंभिक पहचान से समय पर उपचार, थेरेपी और आवश्यक हस्तक्षेप संभव हो पाता है, जिससे बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास में सुधार आता है। उन्होंने चिकित्सा अधिकारियों, एएनएम, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से स्क्रीनिंग, रेफरल और फॉलो-अप को गंभीरता से सुनिश्चित करने की अपील की।
खंड विकास अधिकारी मिठौरा ने प्रोजेक्ट पहचान को एक महत्वपूर्ण और प्रभावी पहल बताते हुए कहा कि आशा संगिनी, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका इस अभियान में अत्यंत अहम है। उन्होंने बच्चों में दिव्यांगता एवं विकासात्मक विलंब की समय पर पहचान कर उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया।
कार्यशाला के दौरान डॉ. अनीता त्रिपाठी ने पावर पॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से 0 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों में 28 प्रकार की दिव्यांगताओं की पहचान, स्क्रीनिंग और रेफरल प्रक्रिया पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया। विशेषज्ञों ने बताया कि जन्म से छह वर्ष तक के बच्चों में शारीरिक, मानसिक, दृष्टि, श्रवण, वाणी एवं अन्य विकास संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान कर उन्हें उचित उपचार एवं पुनर्वास सेवाओं से जोड़ना ही इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य है।
प्रतिभागियों को बच्चों की स्क्रीनिंग, संदिग्ध मामलों की पहचान, समयबद्ध रेफरल, अभिभावकों की काउंसलिंग तथा डीईआईसी सहित संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंच सुनिश्चित करने की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में आशा, एएनएम एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से घर-घर सर्वेक्षण कर पात्र बच्चों की पहचान करने और उन्हें आवश्यक सेवाओं से जोड़ने का आह्वान किया गया।
बताया गया कि प्रोजेक्ट पहचान के अंतर्गत इस प्रकार की कार्यशालाएं जनपद के सभी ब्लॉक मुख्यालयों पर आयोजित की गई हैं। कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा अधिकारी, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, चिकित्सा अधीक्षक/एमओआईसी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी, बीसीपीएम, चिकित्साधिकारी, मुख्यमंत्री फेलो, एएनएम, आशा संगिनी, आशा कार्यकर्ता एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की।