*गरीब की झोपड़ी पर चला प्रशासन का डंडा,मासूम बच्चों के सामने मां को घसीटकर थाने ले जाने का आरोप, निचलौल में तहसील प्रशासन की कार्रवाई पर बवाल।*

Bureau Report /Dilip Kumar Pandey/ Nichlaul News 18 Plus/ Correspondent 

निचलौल थाना क्षेत्र में तहसील प्रशासन की कार्रवाई ने शनिवार को बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। आरोप है कि एक गरीब महिला की झोपड़ी हटाने पहुंची प्रशासनिक टीम ने भारी पुलिस बल के साथ दबंगई भरा रवैया अपनाया और महिला को उसके छोटे-छोटे बच्चों सहित जबरन थाने ले आई। घटना के दौरान मासूम बच्चे अपनी मां के पीछे रोते-बिलखते दौड़ते रहे। यह दृश्य देखकर मौके पर मौजूद लोग भी भावुक हो उठे और प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़े करने लगे।

 

पीड़ित महिला ने आरोप लगाया कि जिस समय प्रशासन उसकी झोपड़ी हटाने पहुंचा, उस समय घर पर कोई जिम्मेदार पुरुष सदस्य मौजूद नहीं था। इसके बावजूद अधिकारियों ने उसकी एक न सुनी और हाथ पकड़कर थाने ले जाने लगे। महिला लगातार गुहार लगाती रही कि वह अपनी ही जमीन पर छोटी सी झोपड़ी बनाकर किसी तरह अपने परिवार का गुजारा कर रही है, लेकिन प्रशासन ने उसकी मजबूरी को नजरअंदाज कर दिया।

 

महिला ने फूट-फूट कर रोते हुए आरोप लगाया कि क्षेत्र में कई प्रभावशाली लोगों द्वारा बड़े पैमाने पर कब्जा किया गया है, लेकिन प्रशासन की नजर सिर्फ गरीबों पर ही पड़ती है। उसका कहना था कि “हम गरीब हैं इसलिए हमें आसानी से उजाड़ा जा रहा है। हमारे बच्चों के सिर से छत छीन ली जा रही है, जबकि बड़े कब्जाधारियों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।”

 

घटना की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीणों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ मौके पर जमा हो गई। लोगों में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर आक्रोश देखने को मिला। कई लोगों ने आरोप लगाया कि बिना मानवीय संवेदना के की गई इस कार्रवाई ने गरीब परिवार को सड़क पर ला खड़ा किया है।

 

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला के बच्चे लगातार रोते हुए अपनी मां को छोड़ने की गुहार लगाते रहे, लेकिन पुलिस और प्रशासनिक टीम अपनी कार्रवाई में जुटी रही। मौके पर अफरा-तफरी और तनाव का माहौल बना रहा।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन को कार्रवाई करनी ही थी तो पहले महिला को नोटिस देकर वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए थी। अचानक की गई कार्रवाई से पूरा परिवार दहशत में है।

 

फिलहाल इस मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज है और लोग प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। वहीं प्रशासन की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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