निचलौल में ‘कारखास’ के नाम पर कथित वसूली के आरोप, जांच की मांग! मनीष सिंह का बढ़ता दब दबा!

Bureau Report /News 18 Plus /Nichlaul 

चिकन दुकानों से लेकर रेस्टोरेंट और शराब कारोबार तक वसूली के दावे; मनीष सिंह की भूमिका को लेकर उठे सवाल?

 

निचलौल/महराजगंज। निचलौल थाना क्षेत्र में कथित अवैध गतिविधियों और उनसे जुड़े लेन-देन को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा और कुछ लोगों के आरोपों में दावा किया जा रहा है कि चिकन-मांस की दुकानों से लेकर रेस्टोरेंट, शराब तथा अन्य संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े स्थानों पर कथित रूप से नियमित वसूली की जाती है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि हालांकि अभी नहीं हो सकी है।

इन चर्चाओं के केंद्र में मनीष सिंह नाम सामने आ रहा है, जिन्हें स्थानीय स्तर पर कथित तौर पर ‘कारखास’ कहकर संबोधित किया जाता है। हालांकि ‘कारखास’ कोई आधिकारिक पुलिस पद नहीं है। आरोप लगाने वालों का दावा है कि थाना क्षेत्र में कई कारोबारियों और प्रतिष्ठान संचालकों से कथित तौर पर संपर्क रखा जाता है तथा अलग-अलग गतिविधियों के नाम पर रकम वसूले जाने की चर्चा है।

लाखों रुपये की वसूली के दावे, प्रमाण पर सवाल

स्थानीय चर्चाओं में कभी करीब नौ लाख रुपये तक की कथित वसूली की बात कही जा रही है। हालांकि यह रकम किस अवधि में, किन लोगों से और किस आधार पर वसूली गई—इस संबंध में कोई सार्वजनिक दस्तावेज या स्वतंत्र रूप से सत्यापित प्रमाण सामने नहीं आया है। ऐसे में इन दावों की निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी जा रही है।

रेस्टोरेंट और अन्य प्रतिष्ठानों पर भी नजर?

आरोप लगाने वाले लोगों का कहना है कि थाना क्षेत्र के कुछ रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक स्थानों से भी कथित रूप से रकम लिए जाने की चर्चा है। यदि ऐसे आरोप सही हैं तो यह गंभीर विषय हो सकता है और इसकी जांच पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों अथवा किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से कराए जाने की मांग उठ सकती है।

निचलौल क्षेत्र में अवैध गतिविधियों को लेकर पूर्व में भी शिकायतें सामने आती रही हैं। हाल ही में पुलिस ने अवैध रूप से संचालित दो मीट/चिकन दुकानों को सीज कर दो आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। वहीं पूर्व में निचलौल क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री को लेकर ग्रामीणों की शिकायतें भी प्रकाशित हुई हैं।

वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में जांच की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी पुलिसकर्मी या पुलिस से जुड़े व्यक्ति पर अवैध वसूली अथवा गैरकानूनी गतिविधियों को संरक्षण देने के आरोप हैं तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जांच में संबंधित प्रतिष्ठानों, शिकायतकर्ताओं, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल/अन्य वैधानिक साक्ष्यों और वित्तीय लेन-देन की जानकारी को शामिल किया जा सकता है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि कथित वसूली के आरोप लगाए जा रहे हैं तो उनकी वास्तविकता क्या है और इसके पीछे कौन लोग हैं? इसका जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकता है।

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