न्यूज़ 18प्लस ब्यूरो/ठूठीबारी
महराजगंज। ठूठीबारी थाना क्षेत्र अंतर्गत नौनिया ग्राम सभा में शिव मंदिर के सामने कथित अवैध कब्जे और अतिक्रमण का मामला एक बार फिर चर्चा में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मंदिर के सामने लंबे समय से अतिक्रमण की स्थिति बनी हुई है, जिससे धार्मिक स्थल के आसपास का सार्वजनिक स्थान प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि मामले को लेकर पूर्व में कई बार समाचार प्रकाशित किया जा चुका है, बावजूद इसके अब तक जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस की ओर से प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आई है।
ग्रामीणों के मुताबिक, शिव मंदिर के ठीक सामने कथित रूप से कब्जा कर गतिविधियां संचालित होने से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि मंदिर के नजदीक बैठकर कुछ लोग कथित तौर पर नशे का सेवन करते हैं, जिससे आसपास का माहौल प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने ऐसे लोगों को तत्काल हटाने और सार्वजनिक स्थान को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है।
विद्यालय की नजदीकी को लेकर भी जताई चिंता
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर के आसपास विद्यालय भी स्थित है। ऐसे में यदि नशे से जुड़ी गतिविधियां अथवा अनुचित माहौल होने की शिकायत सही पाई जाती है तो इसका बच्चों पर गलत प्रभाव पड़ सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से विद्यालय और मंदिर के आसपास विशेष निगरानी रखने तथा सार्वजनिक स्थल पर किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक गतिविधि रोकने की मांग की है।
खबरें प्रकाशित होने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
ग्रामीणों का कहना है कि अतिक्रमण और कथित नशे की गतिविधियों से संबंधित खबरें पहले भी प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया है। लोगों का सवाल है कि यदि सार्वजनिक भूमि अथवा सरकारी संपत्ति पर वास्तव में अवैध कब्जा है तो प्रशासन की ओर से राजस्व अभिलेखों और स्थलीय जांच के आधार पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है?
ग्रामीणों ने मांग की है कि राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंचकर स्थलीय सत्यापन करे, अतिक्रमण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे और यदि कब्जा अवैध पाया जाता है तो नियमानुसार उसे हटाया जाए। साथ ही मंदिर एवं विद्यालय के आसपास नशे की गतिविधियों की शिकायतों की भी निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
मामले को लेकर अब स्थानीय लोगों की निगाहें जिला प्रशासन और ठूठीबारी पुलिस पर टिकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि केवल शिकायतों और खबरों तक मामला सीमित न रहे, बल्कि मौके की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए। यदि अतिक्रमण अवैध पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए सार्वजनिक स्थल को मुक्त कराया जाए।