Bureau Report /News 18 Plus /Nautanwa
आस्था के मंच पर आर्केस्ट्रा के नाम पर अश्लीलता का आरोप, आयोजक के खिलाफ तत्काल जांच और मुकदमे की मांग।
महराजगंज। नौतनवा थाना क्षेत्र के गणेशपुर, पोस्ट करमहवा निवासी जयचंद यादव द्वारा मां जगदंबा के पंडाल में आर्केस्ट्रा कार्यक्रम आयोजित किए जाने और उसमें कथित तौर पर अश्लील डांस व आपत्तिजनक गानों के मंचन का मामला सामने आया है। धार्मिक आयोजन की आड़ में इस तरह के कार्यक्रम के आरोप ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय स्तर पर उठ रही शिकायतों के मुताबिक मां जगदंबा के पंडाल में आयोजित कार्यक्रम में धार्मिक माहौल की मर्यादा के विपरीत अश्लील नृत्य और गानों का आयोजन किया गया। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल सामाजिक मर्यादा का मामला नहीं, बल्कि धार्मिक आयोजन की आड़ में नियम-कानून और आस्था की भावनाओं से खिलवाड़ का गंभीर विषय बन सकता है।
आस्था के मंच पर अश्लीलता, जिम्मेदार कौन?
सवाल यह है कि धार्मिक पंडाल में इस प्रकार के कार्यक्रम की अनुमति किस आधार पर दी गई और आयोजन की निगरानी के लिए जिम्मेदार पुलिस-प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की? यदि पुलिस को आयोजन की जानकारी थी तो कथित आपत्तिजनक कार्यक्रम को रोकने के लिए तत्काल कदम क्यों नहीं उठाए गए? और यदि जानकारी नहीं थी तो क्षेत्र में पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं की भावनाओं और सार्वजनिक मर्यादा का ध्यान रखना आयोजकों की जिम्मेदारी है। वहीं पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है कि किसी भी आयोजन के नाम पर कानून व्यवस्था, सामाजिक शालीनता अथवा धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ न होने पाए।
शिकायत पर तत्काल जांच की जरूरत
मामले में जयचंद यादव और आयोजन से जुड़े अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। कार्यक्रम की अनुमति, आयोजन स्थल, प्रस्तुत किए गए गानों-नृत्य तथा मौके पर मौजूद जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच कराई जानी चाहिए। यदि जांच में आरोप सही मिलते हैं तो संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर प्रभावी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
पुलिस की भूमिका पर भी हो जांच
सबसे बड़ा सवाल पुलिस की भूमिका को लेकर है। आखिर धार्मिक आयोजन के दौरान कथित अश्लील कार्यक्रम कैसे आयोजित हो गया? क्या स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी थी? क्या आयोजकों से अनुमति ली गई थी? क्या मौके पर पुलिसकर्मी मौजूद थे? अगर मौजूद थे तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
आस्था के नाम पर किसी भी तरह की अश्लीलता या मर्यादा भंग करने वाली गतिविधि को सामान्य मान लेना पुलिस प्रशासन की गंभीर लापरवाही मानी जाएगी। अब जरूरत केवल औपचारिकता निभाने की नहीं, बल्कि शिकायत का तत्काल संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ स्पष्ट कार्रवाई करने की है।
आस्था और धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।