Bureau Report/ News 18 Plus /Siswa Kothibar
पत्रकार ने घटना की जानकारी लेने के लिए किया व्हाट्सएप कॉल, सामान्य कॉल पर व्यस्त बताने के बाद भी नहीं आया रिटर्न कॉल; थानाध्यक्ष अखिलेश वर्मा बोले—मामला मेरी जानकारी में नहीं था।
सिसवा बाजार (महराजगंज)। कोठीभार थाना क्षेत्र में पुलिस की कार्यशैली और पत्रकारों के साथ संवाद को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एक घटना के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए चौकी प्रभारी दीप नारायण मौर्य से संपर्क करने का प्रयास किए जाने के बावजूद बातचीत नहीं हो सकी। पत्रकार का आरोप है कि उन्होंने चौकी प्रभारी को व्हाट्सएप कॉल किया था, लेकिन जब सामान्य कॉल के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो फोन व्यस्त बताया गया। इसके बाद भी चौकी प्रभारी की ओर से वापस कॉल कर घटना के संबंध में जानकारी देना उचित नहीं समझा गया।
पत्रकार का कहना है कि किसी घटना की वास्तविक जानकारी जुटाना और संबंधित पुलिस अधिकारी का पक्ष जानना पत्रकारिता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में जिम्मेदार पुलिस अधिकारी से संपर्क स्थापित नहीं हो पाना कई सवाल खड़े करता है। हालांकि, संबंधित अधिकारी की ओर से फोन वापस नहीं किए जाने के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है।
पत्रकारों के साथ भेदभाव का आरोप
पत्रकार ने चौकी प्रभारी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पत्रकारों के साथ व्यवहार में भेदभाव किया जाता है। उनका दावा है कि कुछ मामलों में खबरों को लेकर असहज स्थिति पैदा होती है और पत्रकारों को कथित तौर पर यह कहकर जवाब दिया जाता है कि यहां नहीं तो किसी दूसरी जगह चले जाएंगे। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और इस संबंध में चौकी प्रभारी का पक्ष सामने आना बाकी है।
पत्रकार ने क्षेत्र में कथित अवैध कारोबार और अन्य गतिविधियों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इन मामलों से संबंधित तथ्यों और साक्ष्यों को जुटाया जा रहा है तथा उचित प्रमाण मिलने पर पूरे प्रकरण को सार्वजनिक किया जाएगा। फिलहाल, कथित कारोबारों की प्रकृति, उनमें संबंधित लोगों की भूमिका और आरोपों की सत्यता की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
थानाध्यक्ष अखिलेश वर्मा ने कही यह बात
इस संबंध में कोठीभार थानाध्यक्ष अखिलेश वर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मामला उनकी जानकारी में नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई खबर या शिकायत सामने आती है तो उसके तथ्यों के आधार पर मामले को देखा जा सकता है।
पत्रकार का आरोप है कि संबंधित मामलों में खबर प्रकाशित होने की बात सामने आने पर कथित तौर पर उन्हें चुनौतीपूर्ण लहजे में जवाब दिया जाता है कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। हालांकि, इस कथित बयान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित चौकी प्रभारी का पक्ष प्राप्त किया जाना शेष है।
निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग
पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या संबंधित आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और पत्रकार द्वारा उठाए गए सवालों पर पुलिस विभाग अपना पक्ष स्पष्ट करेगा? यदि किसी पुलिसकर्मी के विरुद्ध अवैध गतिविधियों में संलिप्तता या पत्रकारों के साथ अनुचित व्यवहार की शिकायत है, तो उसकी जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए।
फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों का पक्ष, उपलब्ध साक्ष्य और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।