मुख्यमंत्री की ‘हर घर बिजली’ योजना को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर उठे सवाल? पांच साल से ट्रांसफार्मर बना शोपीस

न्यूज़ 18 प्लस ब्यूरो: विशाल प्रजापति सिसवा

 

 

अंधेरे में जीने को मजबूर कमाता गांव 

 

महराजगंज जनपद के सिसवा विद्युत खंड अंतर्गत ग्राम सभा कमाता में लगा ट्रांसफार्मर पिछले करीब पांच वर्षों से केवल शोपीस बनकर खड़ा है, लेकिन ग्रामीणों को आज तक बिजली की सुविधा नसीब नहीं हो सकी। एक ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा हर गांव और हर घर तक बिजली पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कमाता गांव की तस्वीर इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

 

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में ट्रांसफार्मर स्थापित किए जाने के बावजूद अब तक विद्युत आपूर्ति शुरू नहीं की गई। पांच वर्षों का लंबा समय बीत जाने के बाद भी विभागीय अधिकारियों की उदासीनता और लापरवाही के कारण गांव अंधेरे में जीवन यापन करने को मजबूर है। इससे बच्चों की पढ़ाई, किसानों के कार्य और ग्रामीणों की दैनिक जरूरतें प्रभावित हो रही हैं।

 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ट्रांसफार्मर वर्षों पहले लगाया जा चुका था तो आखिर अब तक उसे चालू क्यों नहीं किया गया? क्या संबंधित विभाग के एक्सईएन और एसडीओ ने कभी मौके का निरीक्षण किया? यदि किया तो समस्या का समाधान क्यों नहीं हुआ? ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतें और मांगें उठाई गईं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।

 

ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई होती तो आज कमाता गांव बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित नहीं रहता। पांच वर्षों से लंबित यह मामला विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।

 

अब ग्रामीणों की निगाहें जनपद के नवागत जिलाधिकारी  पर टिकी हैं। लोगों को उम्मीद है कि जिलाधिकारी इस प्रकरण का संज्ञान लेकर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करेंगे और गांव में शीघ्र विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कराएंगे।

 

सवाल जो जवाब मांग रहे हैं

पांच साल पहले लगाया गया ट्रांसफार्मर आज तक चालू क्यों नहीं हुआ?

 

क्या विभागीय अधिकारियों ने कभी इसकी समीक्षा की?

 

ग्रामीणों को बिजली से वंचित रखने के लिए जिम्मेदार कौन?

 

क्या लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?

 

आखिर कमाता गांव के घरों में बिजली कब पहुंचेगी?

 

कमाता गांव के ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें आश्वासनों की नहीं, बल्कि ट्रांसफार्मर चालू होने और घरों में रोशनी पहुंचने का इंतजार है।

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