न्यूज़ 18प्लस ब्यूरो रिपोर्ट: दिलीप कुमार पाण्डेय ठूठीबारी
बिना बैरिकेडिंग मौत को दावत!
महराजगंज जनपद के निचलौल-ठूठीबारी मार्ग पर गड़ौरा के पास बन रही पुलिया अब लोगों के लिए सुविधा नहीं बल्कि “मौत का जाल” बनती जा रही है। निर्माण कार्य के दौरान न तो किसी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था की गई है और न ही सड़क पर बैरिकेडिंग, संकेतक बोर्ड या रात में चेतावनी देने वाली लाइटें लगाई गई हैं। ऐसे में हर गुजरने वाला राहगीर खतरे के साए में सफर करने को मजबूर है।
सबसे बड़ी बात यह है कि यह मार्ग निचलौल और महराजगंज को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण नेशनल हाईवे मार्ग है, जहां दिन-रात भारी वाहनों, स्कूली बच्चों, एंबुलेंस और आम नागरिकों की आवाजाही बनी रहती है। बावजूद इसके निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार विभाग की घोर लापरवाही लगातार हादसों को न्योता दे रही है।
ग्रामीणों में भारी आक्रोश
स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों का आरोप है कि पुलिया निर्माण कार्य पूरी तरह अव्यवस्थित तरीके से कराया जा रहा है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे खोद दिए गए हैं, लेकिन वहां न तो कोई सुरक्षा घेरा बनाया गया है और न ही वैकल्पिक रास्ते की समुचित व्यवस्था की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि दिन हो या रात, इस मार्ग से गुजरना किसी खतरे से कम नहीं है। खासकर रात के समय स्थिति और भयावह हो जाती है क्योंकि अंधेरे में वाहन चालकों को निर्माणाधीन हिस्से का अंदाजा तक नहीं लग पाता। यही वजह है कि आए दिन छोटे-बड़े हादसे हो रहे हैं और लोग घायल हो रहे हैं।
“शिकायत के बाद भी नहीं जागा ठेकेदार”
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य करा रहे राजस्थानी ठेकेदार से कई बार शिकायत की गई, लेकिन उसके बावजूद सुरक्षा इंतजामों को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई। लोगों का कहना है कि ठेकेदार मनमाने तरीके से काम करा रहा है और प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी उसके हौसले बढ़ा रही है।
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर किसकी अनुमति से इतनी बड़ी लापरवाही के साथ निर्माण कार्य कराया जा रहा है? यदि कोई बड़ा हादसा होता है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
लगातार हो रही दुर्घटनाओं और जनता की शिकायतों के बावजूद संबंधित विभाग और प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। यही कारण है कि लोगों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द सुरक्षा व्यवस्था और बैरिकेडिंग नहीं कराई गई तो आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
हर पल मंडरा रहा खतरा
निर्माण स्थल पर न तो रिफ्लेक्टर लगाए गए हैं, न चेतावनी बोर्ड और न ही ट्रैफिक नियंत्रित करने के लिए कोई कर्मचारी तैनात है। तेज रफ्तार वाहनों के बीच यह लापरवाही कभी भी बड़े हादसे में बदल सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या लोगों की जान की कीमत इतनी सस्ती हो गई है कि बिना सुरक्षा मानकों के निर्माण कार्य खुलेआम चलता रहे?
जनता की मांग है कि तत्काल बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत, रात्रि प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए, अन्यथा यह लापरवाही किसी दिन कई परिवारों की जिंदगी उजाड़ सकती है।