Bureau Report /Anubhav Patel /Nichlaul Correspondent /News 18 Plus
महराजगंज जनपद के निचलौल ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत कड़जा में बनाई गई डिजिटल लाइब्रेरी अब सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई यह लाइब्रेरी केवल “शो-पीस” बनकर रह गई है और इसका जमीनी स्तर पर कोई उपयोग नहीं हो रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि डिजिटल लाइब्रेरी का उद्देश्य गांव के युवाओं और छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आधुनिक संसाधन जैसे कंप्यूटर, इंटरनेट और पुस्तकें निशुल्क उपलब्ध कराना होता है, लेकिन कड़जा की यह लाइब्रेरी अपने मूल उद्देश्य से पूरी तरह भटक चुकी है। यहां न तो नियमित रूप से लाइब्रेरी खुलती है और न ही छात्रों को कोई सुविधा मिल पा रही है।
स्थानीय लोगों ने ग्राम प्रधान नर्मदा देवी और सचिव राजेंद्र चौधरी पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि बिना किसी ठोस योजना और निगरानी के इस लाइब्रेरी का निर्माण कर दिया गया। अब हालात यह हैं कि न तो यहां पढ़ाई होती है और न ही किसी प्रकार की गतिविधि — केवल भवन खड़ा है, जो सरकारी धन के दुरुपयोग की कहानी बयां कर रहा है।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि पंचायत स्तर पर बनाई गई इस महत्वपूर्ण योजना की निगरानी करने में संबंधित अधिकारी भी पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं। सवाल यह उठता है कि इस लापरवाही के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है — ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव या फिर जिला प्रशासन?
निचलौल ब्लॉक पहले भी भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर सुर्खियों में रहा है। ऐसे में कड़जा की डिजिटल लाइब्रेरी का मामला इस धारणा को और मजबूत करता है कि विकास योजनाएं कागजों तक ही सीमित रह जाती हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले पर क्या कार्रवाई करता है। क्या जिम्मेदारों पर सख्त कदम उठाया जाएगा या फिर यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह धूल फांकता रह जाएगा?
फिलहाल, कड़जा की डिजिटल लाइब्रेरी ग्रामीणों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का प्रतीक बन चुकी है।