हेलमेट नहीं था तो कानून समझाइए, लात-घूंसे क्यों?”निचलौल में पुलिसिया रवैये पर उठे सवाल, थानाध्यक्ष पर युवक से मारपीट और अभद्रता के आरोप।

Report: News 18 Plus Bureau: Dilip Kumar Pandey/ Nichlaul

 

महराजगंज जनपद के निचलौल थाना क्षेत्र में वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। बहुआर चौकी क्षेत्र में हुई कथित मारपीट की घटना ने पुलिस के व्यवहार और अधिकारों को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। आरोप है कि वाहन चेकिंग के दौरान एक युवक के साथ न सिर्फ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, बल्कि उसके साथ मारपीट भी की गई।

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, युवक वाहन से दवा लेकर अपने घर जा रहा था। इसी दौरान वाहन चेकिंग अभियान के तहत उसे रोका गया। युवक का कहना है कि उसकी गाड़ी के सभी कागजात मौजूद थे, केवल उसने हेलमेट नहीं पहन रखा था। लेकिन आरोप है कि मामूली यातायात उल्लंघन को लेकर थाना प्रभारी द्वारा कथित रूप से गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और मारपीट की गई।

 

इस मामले में जब हमारे संवाददाता दिलीप पाण्डेय ने निचलौल थानाध्यक्ष अंकित सिंह से बातचीत की, तो उन्होंने कहा कि “गाड़ी के कागज़ नहीं थे।” हालांकि युवक लगातार यह दावा कर रहा है कि उसके पास सभी वैध दस्तावेज मौजूद थे और केवल हेलमेट नहीं था।

 

थानाध्यक्ष ने बातचीत के दौरान यह भी कहा कि “मेरी आवाज थोड़ी ऊंची है”, लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या ऊंची आवाज का मतलब कानून हाथ में लेना है? क्या यातायात नियमों के उल्लंघन पर पुलिस को किसी नागरिक के साथ मारपीट और अभद्रता करने का अधिकार मिल जाता है?

 

जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है कि यदि युवक ने हेलमेट नहीं पहना था तो उसका चालान काटा जाता, कानूनी कार्रवाई की जाती, लेकिन कथित तौर पर लात-घूंसे और गालियों का इस्तेमाल क्यों किया गया? क्या सड़क पर ही पुलिस न्यायपालिका की भूमिका निभाने लगी है?

 

गौरतलब है कि थानाध्यक्ष अंकित सिंह हाल ही में निचलौल थाना पहुंचे हैं और अभी उन्हें क्षेत्र में आए चार दिन भी पूरे नहीं हुए हैं, लेकिन उनके तेवरों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बताया जा रहा है कि वे पूर्व में महराजगंज एसपी कार्यालय में सेवा दे चुके हैं तथा बहुआर चौकी में सब इंस्पेक्टर के पद पर भी तैनात रह चुके हैं। क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों की उन्हें अच्छी जानकारी है, ऐसे में इस प्रकार के आरोप पुलिस की कार्यशैली पर और गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं।

 

अब निगाहें जनपद के पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी पर टिकी हैं। जिले में सख्त और तेज़ तर्रार छवि रखने वाले एसपी इस पूरे प्रकरण में क्या कार्रवाई करते हैं, यह आने वाले समय में साफ होगा। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला सिर्फ एक युवक की पिटाई का नहीं, बल्कि पुलिस और जनता के बीच भरोसे के संकट का भी प्रतीक बन सकता है।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि कानून का सम्मान जरूरी है, लेकिन कानून लागू करने वालों को भी संवैधानिक मर्यादा और मानवाधिकारों का पालन करना चाहिए। जनता अब इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है।

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