Bureau Report/ Dilip Kumar Pandey /Nichlaul Correspondent/ News 18 Plus
महराजगंज जिले के निचलौल थाना क्षेत्र से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां एक पत्रकार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। मामला वर्ष 2019 से जुड़ा बताया जा रहा है, जब एक मासूम बच्चा जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था। उस समय डॉक्टर की लापरवाही के खिलाफ खबर प्रकाशित करना पत्रकार को भारी पड़ गया—और अब उसी की “सजा” मिलने का आरोप लगाया जा रहा है।
पत्रकार का आरोप है कि निचलौल थाने में तैनात रहे सत्येंद्र सिंह की वजह से उन्हें लगातार प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “पत्रकारिता से कोई समझौता नहीं होगा—जहां गलत होगा, वहां मेरी कलम चलेगी, चाहे कोई कितना भी दबाव क्यों न बनाए।”
सूत्रों के जानकारी अनुसार!
“मुकदमा लिखवाना है? पैसा तय है!” — थाने पर संगीन आरोप
पत्रकार ने निचलौल थाना पुलिस पर बेहद गंभीर और संगठित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। आरोपों के मुताबिक थाने में मामलों के “रेट” तक तय हैं—
सुलह कराने का मामला: ₹2,000
सामान्य मुकदमा: ₹5,000
छेड़खानी का मामला: ₹50,000
दुष्कर्म का मामला: ₹1 से 2 लाख
हत्या का मामला: ₹5 लाख
इन आरोपों ने पुलिस व्यवस्था की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आरोप यह भी है कि निचलौल थाने में “अमीरी-गरीबी भाड़ में जाए, पैसा चाहिए तो चाहिए” जैसी मानसिकता हावी है।
हाईकोर्ट के सख्त आदेश की अनदेखी?
पत्रकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक सख्त फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें पुलिस की मनमानी और अवैध हिरासत पर कड़ी टिप्पणी की गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था—
शांति भंग” की आशंका में गिरफ्तारी के दौरान सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य है
24 घंटे से अधिक अवैध हिरासत पर ₹25,000 प्रतिदिन मुआवजा देना होगा
इसके बावजूद आरोप है कि निचलौल थाना पुलिस इन आदेशों की खुलेआम अनदेखी कर रही है।
“पत्रकारों को दी जाती है धमकी”
पत्रकार का दावा है कि जिले में कई थानाध्यक्ष पत्रकारों को डराने-धमकाने का काम करते हैं। निचलौल थाना इसका उदाहरण बनता जा रहा है, जहां पुलिसकर्मी खुलेआम दबाव बनाते हैं और आवाज उठाने वालों को निशाना बनाया जाता है।
क्षेत्र का व्यापक दायरा, लेकिन जवाबदेही शून्य?
भारत की जनगणना 2011 के अनुसार निचलौल क्षेत्र में 316 गांव हैं, जबकि पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक 100 से अधिक गांव सीधे थाने के अधीन आते हैं। इतने बड़े क्षेत्र में कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी होने के बावजूद, पुलिस पर लगे ये आरोप बेहद चिंताजनक हैं।
अब गेंद एसपी के पाले में
जिले के नवागत पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी से अब सीधी अपील की गई है कि ऐसे अधिकारियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए। पत्रकार ने मांग की है कि “ऐसे पुलिसकर्मी को तुरंत प्रभाव से निलंबित किया जाए, जो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को दबाने का प्रयास कर रहा है।”
निष्कर्ष
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति या एक थाने का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल है। अगर आरोपों में सच्चाई है, तो यह कानून के राज पर सीधा हमला है। अब देखना होगा कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या कदम उठाता है—क्योंकि जनता की नजरें अब फैसले पर टिकी हैं।