न्यूज़ 18प्लस ब्यूरो/ नोयडा दिल्ली
कथित दलालों के नेटवर्क के जरिए उपभोक्ताओं से रकम लेने का आरोप, पुराने बिल संशोधनों की जांच हुई तो खुल सकते हैं कई राज।
महराजगंज/निचलौल। निचलौल विद्युत उपकेंद्र में बिजली बिलों को लेकर चल रही कथित अनियमितताओं की चर्चाओं ने अब गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसडीओ कार्यालय में तैनात बड़े बाबू चंद्रजीत निषाद की कार्यप्रणाली को लेकर उपभोक्ताओं और विभागीय स्तर पर तरह-तरह के आरोप सामने आ रहे हैं। आरोप है कि बिल में कथित रूप से कमी-बढ़ोतरी कराने, कनेक्शन कटवाने-जुड़वाने तथा बिल निस्तारण का भरोसा देकर उपभोक्ताओं से रकम वसूलने का कथित नेटवर्क सक्रिय है।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक अथवा स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच ही सच्चाई सामने ला सकती है।
‘एक लाख का बिल है तो 20 हजार लाओ, काम हो जाएगा’—दावों ने बढ़ाई हलचल
सबसे गंभीर आरोप यह है कि कुछ उपभोक्ताओं को कथित तौर पर उनके भारी-भरकम बिजली बिल को कम कराने का भरोसा दिया जाता है। आरोप लगाने वाले लोगों का दावा है कि बड़े बिल का हवाला देकर कथित तौर पर कम रकम में बिल ‘फाइनल’ कराने का आश्वासन दिया जाता है।
यदि इस तरह के दावे जांच में सही पाए जाते हैं तो मामला केवल अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विभागीय भ्रष्टाचार और उपभोक्ता शोषण का गंभीर विषय बन सकता है।
लाइनमैनों और कथित बिचौलियों की भूमिका पर भी सवाल
मामले में कुछ लाइनमैनों और कथित बिचौलियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि उपभोक्ताओं और कार्यालय के बीच संपर्क स्थापित करने के लिए कुछ लोगों का इस्तेमाल किया जाता है और कथित रूप से रकम ऊपर तक पहुंचाने की चर्चा है।
यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि बिजली कनेक्शन काटने या दोबारा जुड़वाने जैसी परिस्थितियों में उपभोक्ताओं पर दबाव बनाया जाता है और इसके बदले कथित रूप से पैसे लिए जाते हैं।
इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित कर्मचारियों के मोबाइल रिकॉर्ड, शिकायत रजिस्टर, बिल संशोधन लॉग और विभागीय डिजिटल रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
पुराने बिलों का डिजिटल रिकॉर्ड खोले तो सामने आएगी असली तस्वीर?
मामले में सबसे बड़ा सवाल बिजली बिलों में हुए पुराने संशोधनों को लेकर है। किस उपभोक्ता का बिल कब बदला गया, पहले कितनी राशि थी और संशोधन के बाद कितनी हुई—इन सभी बिंदुओं का डिजिटल रिकॉर्ड विभाग के पास मौजूद होने की संभावना है।
ऐसे में यदि पिछले कुछ वर्षों के बिल संशोधन, भुगतान विवरण और लॉगिन गतिविधियों की स्वतंत्र जांच कराई जाए तो यह स्पष्ट हो सकता है कि बिलों में बदलाव नियमों के तहत हुए या किसी अन्य तरीके से।
उपभोक्ताओं का शोषण हुआ तो जिम्मेदार कौन?
आरोप यह भी हैं कि कुछ उपभोक्ताओं को कथित तौर पर आश्वासन देकर लंबे समय तक कार्यालय के चक्कर लगवाए जाते हैं। यदि किसी उपभोक्ता से पैसे लेकर उसका काम नहीं किया गया या गलत तरीके से बिजली कनेक्शन काटा-जुड़वाया गया, तो इसकी जवाबदेही तय होना जरूरी है।
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि उपभोक्ता की शिकायत सही है तो उसकी सुनवाई किस स्तर पर होगी और जिम्मेदारी किस अधिकारी या कर्मचारी की तय की जाएगी?
अधीक्षण अभियंता और जिलाधिकारी से जांच की मांग
मामले को लेकर अब निगाहें विभाग के उच्चाधिकारियों पर टिकी हैं। उपभोक्ताओं की मांग है कि निचलौल विद्युत उपकेंद्र में पिछले समय के सभी बिल संशोधन, भुगतान रिकॉर्ड, कनेक्शन विच्छेदन-जोड़ने की कार्रवाई और संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
साथ ही यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि क्या किसी कर्मचारी या बिचौलिए ने उपभोक्ताओं से कथित रूप से रकम लेकर विभागीय काम कराने का प्रयास किया।
अब कार्रवाई का इंतजार
यदि आरोप निराधार हैं तो जांच से स्थिति स्वतः साफ हो जाएगी और यदि आरोपों में सच्चाई मिलती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई का रास्ता भी साफ होगा। फिलहाल बड़ा सवाल यही है कि क्या जिलाधिकारी और विद्युत विभाग के अधीक्षण अभियंता इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराएंगे या फिर निचलौल उपकेंद्र में उठ रहे ‘बिल खेल’ के सवाल फाइलों में ही दबे रह जाएंगे?
नोट: प्रस्तुत खबर में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।