Bureau Report/ News 18 Plus /Sindooriya
रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज की जांच से लेकर कथित अवैध गतिविधियों तक चर्चा तेज, पुलिस के दावों और स्थानीय आरोपों में अंतर को लेकर उठे सवाल?
सिंदुरिया/महराजगंज। सिंदुरिया थाना क्षेत्र के भागाटार स्थित अग्रहरि गेस्ट हाउस को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं। गेस्ट हाउस से जुड़े रिंकू अग्रहरि और मोनू अग्रहरि को लेकर विभिन्न प्रकार के दावे और आरोप सामने आ रहे हैं। इनमें अनैतिक देह व्यापार, गांजा और अवैध शराब के कारोबार जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार गेस्ट हाउस की गतिविधियों को लेकर पुलिस को समय-समय पर सूचनाएं मिलने की बात कही जा रही है। आरोप यह भी है कि पुलिस की जांच में गेस्ट हाउस के रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जाता है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या पुलिस को पूरा मूल फुटेज और संपूर्ण रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाता है या केवल चुनिंदा हिस्से ही जांच के लिए सामने आते हैं?
‘सूचना मिली, जांच हुई और मामला खत्म’—क्या सिर्फ खानापूर्ति?
स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि शिकायत या सूचना के बाद पुलिस की कार्रवाई महज औपचारिकता तक सीमित रह जाती है। यदि ऐसा है तो बड़ा सवाल यह है कि लगातार सामने आने वाली शिकायतों की स्वतंत्र और विस्तृत जांच क्यों नहीं होती?
पुलिस के पास यदि गेस्ट हाउस का रजिस्टर, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
पुलिस के सोशल मीडिया जवाब ने भी बढ़ाए सवाल
महाराजगंज पुलिस की ओर से सोशल मीडिया पर सतर्कता बरतने तथा मौके पर जांच के दौरान अनैतिक देह व्यापार, गांजा या अवैध शराब का कारोबार नहीं मिलने की जानकारी दिए जाने की बात सामने आती रही है।
इसके विपरीत स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के कारण अब सवाल यह उठ रहा है कि पुलिस की जांच और स्थानीय दावों में से वास्तविक स्थिति क्या है?
इसका जवाब केवल निष्पक्ष जांच, मौके की कार्रवाई और उपलब्ध रिकॉर्ड की पारदर्शी जांच से ही सामने आ सकता है।
पैसे देने के कथित दावे की सत्यता जांच का विषय
सूत्रों के हवाले से यह दावा भी चर्चा में है कि गेस्ट हाउस से जुड़े एक व्यक्ति द्वारा चौकी और थाने को पैसे देने की बात कथित रूप से कही गई। यदि इस तरह का दावा वास्तव में किया गया है तो मामला और गंभीर हो जाता है।
हालांकि, इस कथित बातचीत अथवा दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसकी सत्यता की जांच वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा कराया जाना जरूरी है।
थानाध्यक्ष अनूप तिवारी की भूमिका पर भी सवाल
सिंदुरिया थाने की कमान संभाल रहे थानाध्यक्ष अनूप तिवारी की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय चर्चाओं में उनके पूर्व कार्यक्षेत्र से जोड़कर भी तरह-तरह की बातें कही जा रही हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि थाना क्षेत्र में यदि अवैध गतिविधियों को लेकर लगातार शिकायतें या सूचनाएं सामने आ रही हैं, तो पुलिस ने अब तक क्या ठोस और सत्यापन योग्य कार्रवाई की है?
अब एसपी की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
पूरे मामले में अब निगाहें पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी पर टिकी हैं। क्या गेस्ट हाउस के रजिस्टर, मूल सीसीटीवी फुटेज, पूर्व शिकायतों और पुलिस की जांच रिपोर्ट का वरिष्ठ स्तर से मिलान कराया जाएगा? क्या कथित लेन-देन संबंधी दावों की स्वतंत्र जांच होगी? या मामला केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा?
इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।