*कारख़ास राज!ठूठीबारी थाना में चर्चित कांस्टेबल मृत्युंजय तिवारी पर उठे सवाल, कथित ‘कारख़ास साम्राज्य’ की जांच के बाद भी कार्रवाई शून्य! आखिर किसके संरक्षण में चल रहा पूरा तंत्र?*

Bureau Report /Dilip Kumar Pandey Correspondent/ Thuthibari /News 18 Plus 

भारत-नेपाल सीमा से सटे ठूठीबारी थाना क्षेत्र में कथित “कारख़ास राज” को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म है। पुलिस अधीक्षक द्वारा पूरे प्रकरण की जांच के निर्देश दिए जाने के बावजूद अब तक किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई सामने नहीं आने से स्थानीय लोगों के बीच गंभीर सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि यदि मामला इतना गंभीर था कि एसपी स्तर से जांच कराई गई, तो अब तक कार्रवाई शून्य क्यों है?

 

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि थाना क्षेत्र में लंबे समय से एक कथित “कारख़ास साम्राज्य” प्रभावी भूमिका निभा रहा है। क्षेत्र में चर्चाएं अब सीधे चर्चित कांस्टेबल मृत्युंजय तिवारी तक पहुंच चुकी हैं, जिनका नाम स्थानीय लोगों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों और चर्चाओं में लिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि अब समय आ गया है कि कथित “कारख़ास” की पहचान और भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही संबंधित कांस्टेबल का आधिकारिक पक्ष सामने आया है।

जांच के बाद भी कार्रवाई नहीं, उठ रहे कई सवाल

सूत्रों के अनुसार, पुलिस अधीक्षक द्वारा जिस पूरे प्रकरण में जांच के निर्देश दिए गए थे, उसी मामले में कांस्टेबल मृत्युंजय तिवारी का नाम भी चर्चाओं में है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि वह जांच के दायरे में आने वाले कुछ लोगों के संपर्क में लगातार देखे गए। यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

कारख़ास राज’ पर जनता के सवाल

क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि यदि जांच से जुड़े लोगों के कथित तौर पर आरोपित पक्षों से संपर्क बने रहें, तो निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे की जा सकती है? लोगों का यह भी आरोप है कि कथित बड़े और अवैध कारोबार से जुड़े लोगों के साथ शाम की बैठकों की चर्चाएं आम हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह कथित “कारख़ास राज” किसके संरक्षण में संचालित हो रहा है?

पुलिस प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल

लोगों का कहना है कि यदि लगाए जा रहे सभी आरोप निराधार हैं तो पुलिस प्रशासन को सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं यदि आरोपों में तथ्य हैं तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों पर कठोर एवं पारदर्शी कार्रवाई होनी चाहिए। वर्तमान स्थिति में पुलिस प्रशासन की चुप्पी भी लोगों के बीच कई तरह की आशंकाओं को जन्म दे रही है।

स्वतंत्र जांच की उठी मांग

क्षेत्र के सामाजिक संगठनों एवं जागरूक नागरिकों ने पूरे प्रकरण की किसी वरिष्ठ अधिकारी अथवा स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे न केवल सच्चाई सामने आएगी, बल्कि पुलिस व्यवस्था में जनता का विश्वास भी मजबूत होगा।

अब पूरे जनपद की निगाहें पुलिस अधीक्षक की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। लोगों का कहना है कि केवल निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच ही यह स्पष्ट कर सकती है कि ठूठीबारी थाना क्षेत्र में चर्चित “कारख़ास राज” की वास्तविकता क्या है और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी।

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