Bureau Report /Somendra Dwivedi News 18 Plus/ Lucknow/Uttar Pradesh
उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों की तैयारियों के बीच ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। ऐसे में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के निर्देश पर राज्य सरकार ने सभी निर्वाचित ग्राम प्रधानों को नए पंचायत चुनाव संपन्न होने तक अपनी-अपनी ग्राम पंचायतों में प्रशासक (Administrator) के रूप में कार्यभार संभालने के निर्देश दिए हैं।
सरकार का उद्देश्य है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान गांवों में विकास कार्य, जनकल्याण योजनाएं और प्रशासनिक व्यवस्थाएं प्रभावित न हों। इसके तहत ग्राम प्रधानों को पेंशन वितरण, साफ-सफाई, पेयजल व्यवस्था, सड़क मरम्मत और अन्य जनहित कार्यों को लगातार जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि पंचायतों को केवल प्रशासनिक इकाई न मानकर “ग्रामीण विकास की आत्मा” के रूप में विकसित किया जाए। इसी सोच के तहत प्रदेश भर में ग्राम सचिवालयों को और अधिक सक्रिय एवं तकनीकी रूप से सक्षम बनाने पर जोर दिया गया है। सरकार चाहती है कि ग्रामीणों को अधिकांश सरकारी सेवाएं गांव स्तर पर ही उपलब्ध हों। इसके लिए ग्राम सचिवालयों में आधार केंद्र सहित अन्य जनसुविधाओं को मजबूत करने की तैयारी चल रही है।
प्रदेश सरकार ने विकास कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने के भी निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम पंचायतों में होने वाले निर्माण कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हों तथा सभी योजनाओं की जानकारी ग्राम सचिवालयों के माध्यम से आम जनता तक पहुंचाई जाए।
इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण और जल संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री ने वर्षा जल संचयन तालाबों की समय से सफाई और गांवों में हरियाली बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। ग्राम प्रधानों से कहा गया है कि वे ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करें और गांवों को स्वच्छ एवं हरा-भरा बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
सरकार के इस फैसले को पंचायत चुनाव से पहले ग्रामीण प्रशासन को सुचारु बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसे गांवों के विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।