*अविनाश चंद श्रीवास्तव ‘डोपामिन’ ने दूरदर्शन के मंच पर बिखेरा काव्य का जादू!*

Bureau Report/ Rakesh Tripathi Siswa Kothibar /News 18 Plus /Chief Editor 

 

डिजिटल युग में खोता हुआ प्रेम’ कविता ने छुआ दिल, संवेदनाओं और रिश्तों को बचाने का दिया संदेश।

 

महराजगंज। सिसवा विकास खंड के ग्राम सभा गेरमा निवासी युवा कवि एवं साहित्यकार अविनाश चंद श्रीवास्तव ‘डोपामिन’ ने दूरदर्शन उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित मंच पर अपनी प्रभावशाली काव्य प्रस्तुति से जनपद का नाम रोशन किया। उन्होंने “डिजिटल युग में खोता हुआ प्रेम” विषय पर ऐसी भावपूर्ण कविता प्रस्तुत की कि सभागार देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। उनकी प्रस्तुति ने न केवल श्रोताओं को भावुक किया, बल्कि आधुनिक दौर में बदलते मानवीय रिश्तों पर गंभीर चिंतन के लिए भी प्रेरित किया।

 

अपनी कविता में अविनाश ने बताया कि तकनीक ने दुनिया को भले ही हमारी हथेलियों तक समेट दिया हो, लेकिन दिलों के बीच की दूरियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। उन्होंने आभासी दुनिया की चकाचौंध में रिश्तों की आत्मीयता, संवाद की मिठास और प्रेम की सहजता के धीरे-धीरे खोते जाने का बेहद मार्मिक चित्रण किया। उनकी सशक्त अभिव्यक्ति ने यह संदेश दिया कि आधुनिक संसाधनों से कहीं अधिक मूल्यवान सच्चे रिश्ते, मानवीय संवेदनाएं और निष्कलुष प्रेम हैं।

 

अविनाश चंद श्रीवास्तव ‘डोपामिन’ मूल रूप से सिसवा विकास खंड के ग्राम सभा गेरमा के निवासी हैं। उनके पिता सुरेश चंद श्रीवास्तव पेशे से शिक्षक, माता अर्चना श्रीवास्तव गृहिणी तथा बड़े भाई अभिषेक श्रीवास्तव पत्रकार हैं।

 

उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर से प्राप्त की। इसके बाद चोखराज तुलस्यान सरस्वती विद्या मंदिर, सिसवा से हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की शिक्षा पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने महात्मा गांधी पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, गोरखपुर से स्नातक तथा सेंट एंड्रयूज कॉलेज, गोरखपुर से रसायन शास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की। वर्तमान में वे रसायन शास्त्र विषय में पीएचडी स्कॉलर के रूप में शोध कार्य कर रहे हैं।

 

इस उपलब्धि को अपने जीवन का गौरवपूर्ण और अविस्मरणीय क्षण बताते हुए अविनाश चंद श्रीवास्तव ‘डोपामिन’ ने दूरदर्शन उत्तर प्रदेश परिवार, मंच पर उपस्थित साहित्यकारों एवं देशभर के दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि “माता-पिता, गुरुजनों और पाठकों-श्रोताओं का स्नेह ही मेरी लेखनी की सबसे बड़ी प्रेरणा है। उनके आशीर्वाद से मैं निरंतर आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा हूं।”

 

उन्होंने भविष्य में भी साहित्य के माध्यम से सामाजिक सरोकारों, मानवीय मूल्यों और संवेदनशील विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया। उनकी इस प्रभावशाली प्रस्तुति को साहित्य जगत के विद्वानों और दर्शकों ने भरपूर सराहना दी, जिससे जनपद महराजगंज का गौरव और बढ़ गया।

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