*0-6 वर्ष के बच्चों के विकास पर फोकस: ‘प्रोजेक्ट पहचान’ के तहत 222 क्लस्टरों में प्रशिक्षण अभियान शुरू!*

News 18 Plus /Bureau /Mithora

 

महराजगंज, 04 अगस्त 2026। जनपद में 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों के समग्र विकास तथा प्रारम्भिक अवस्था में विकासात्मक बाधाओं एवं दिव्यांगताओं की समय रहते पहचान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संचालित “प्रोजेक्ट पहचान” के तहत क्लस्टर स्तर पर प्रशिक्षण अभियान का शुभारंभ हो गया है। इस अभिनव पहल के अंतर्गत जिले के 222 क्लस्टरों में आशा, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और एएनएम का क्लस्टरवार प्रशिक्षण कराया जा रहा है, ताकि गांव स्तर पर ऐसे बच्चों की समय रहते पहचान कर उनका उपचार एवं पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके।

 

प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को बच्चों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं व्यवहारिक विकास से संबंधित विभिन्न चरणों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि प्रारम्भिक संकेतों के आधार पर विकासात्मक बाधाओं, बीमारियों अथवा दिव्यांगता की पहचान किस प्रकार की जा सकती है। कार्यशाला में अभिभावकों की काउंसलिंग, बच्चों के विकास संबंधी डेटा के प्रभावी संकलन, स्क्रीनिंग प्रक्रिया, परिवारों से संवाद तथा संदिग्ध बच्चों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के विषय में भी विस्तार से जानकारी दी जा रही है।

 

प्रशिक्षण का संचालन संबंधित क्षेत्र की सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) एवं एएनएम द्वारा किया जा रहा है। प्रत्येक क्लस्टर में समुचित व्यवस्था एवं समन्वय के लिए पंचायत सचिवों को क्लस्टर नोडल अधिकारी बनाया गया है, जबकि विभिन्न विभागों के ब्लॉक स्तरीय अधिकारी एवं कर्मचारी पर्यवेक्षणीय अधिकारी के रूप में नामित किए गए हैं, जो प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी कर रहे हैं।

 

इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों में यदि किसी प्रकार की विकासात्मक बाधा, सीखने में कठिनाई, सुनने, देखने, बोलने, चलने-फिरने अथवा मानसिक विकास से जुड़ी समस्या प्रारम्भिक अवस्था में दिखाई देती है, तो उसकी समय रहते पहचान कर आवश्यक चिकित्सकीय उपचार एवं पुनर्वास उपलब्ध कराया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि कम उम्र में की गई पहचान और हस्तक्षेप से अधिकांश समस्याओं का प्रभावी समाधान संभव है और बच्चों को सामान्य जीवन की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।

 

गौरतलब है कि इस अभियान को जनपद में व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए जिलाधिकारी द्वारा पूर्व में जिला स्तरीय अधिकारियों, खंड विकास अधिकारियों, चिकित्सा अधीक्षकों तथा सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर इसकी रूपरेखा तय की जा चुकी है। इसी क्रम में 31 जुलाई को सभी विकास खंडों में कार्यशालाओं का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य विकास अधिकारी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अभियान की रणनीति, कार्यप्रणाली एवं विभागीय जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की।

 

इस महत्वाकांक्षी अभियान में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। इसके साथ ही स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्राम्य विकास एवं पंचायतीराज विभाग सहित अन्य संबंधित विभाग समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं, ताकि कोई भी जरूरतमंद बच्चा इस पहल से वंचित न रह जाए।

 

अभियान के तहत गांव-गांव सर्वेक्षण किया जाएगा, जिसमें आशा, आंगनबाड़ी कार्यकत्री और एएनएम घर-घर जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग करेंगी। बच्चों की पहचान 6, 12, 18, 24, 36, 48 और 60 माह की आयु के अनुसार निर्धारित विकासात्मक संकेतकों के आधार पर की जाएगी। यदि किसी बच्चे में अपेक्षित विकास नहीं पाया जाता है, तो उसे तत्काल चिकित्सकीय जांच, उपचार एवं पुनर्वास सेवाओं से जोड़ा जाएगा।

 

“प्रोजेक्ट पहचान” का उद्देश्य केवल दिव्यांगता या विकासात्मक बाधाओं की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि समय पर उपचार उपलब्ध कराकर उन्हें दूर करने का प्रयास भी है। इसके माध्यम से बच्चों में संभावित दिव्यांगता की गंभीरता को कम करना, स्कूल ड्रॉपआउट की समस्या घटाना, सामाजिक उपेक्षा से बचाना तथा उन्हें आत्मनिर्भर एवं सक्षम नागरिक बनने की दिशा में अवसर प्रदान करना लक्ष्य है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विकासात्मक बाधाओं की पहचान प्रारम्भिक अवस्था में हो जाए, तो उपचार की सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इसी सोच के साथ “प्रोजेक्ट पहचान” को जनपद में जनभागीदारी आधारित अभियान के रूप में संचालित किया जा रहा है, ताकि प्रत्येक गांव तक स्वास्थ्य एवं बाल विकास सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित हो सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *