*निचलौल में गौ रक्षा धर्म युद्ध यात्रा का भव्य स्वागत, बोले जगद्गुरु शंकराचार्य— ‘जो सरकार गौ माता को राष्ट्रीय दर्जा देगी, समर्थन उसी का होगा!*

News 18 Plus /Bureau /Correspondent Nichlaul 

 

 

सिसवा और निचलौल में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब, पुष्पवर्षा के बीच गौ संरक्षण और सनातन संस्कृति के संवर्धन का दिया संदेश।

 

महराजगंज। गौ रक्षा धर्म युद्ध यात्रा के क्रम में निचलौल विधानसभा क्षेत्र के सिसवा एवं निचलौल स्थित आशा मैरेज हॉल पहुंचे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का श्रद्धालुओं ने भव्य स्वागत किया। दूर-दराज से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन किया। पूरे कार्यक्रम स्थल पर धार्मिक उत्साह, जयघोष और भक्ति का वातावरण देखने को मिला।

 

अपने संबोधन में जगद्गुरु शंकराचार्य ने स्पष्ट कहा कि गौ रक्षा धर्म युद्ध यात्रा किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि इस यात्रा का एकमात्र उद्देश्य गौ माता के संरक्षण के प्रति समाज और सरकार का ध्यान आकर्षित करना है।

 

उन्होंने कहा, “हम किसी पार्टी विशेष का विरोध नहीं कर रहे हैं। जो सरकार गौ माता को पशु के स्थान पर ‘राष्ट्रीय गौ माता’ का दर्जा देगी, हमारा समर्थन उसी के साथ रहेगा।” उन्होंने कहा कि गौ माता भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की आत्मा हैं तथा उनके संरक्षण के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे आना चाहिए।

 

जगद्गुरु शंकराचार्य ने बताया कि गौ रक्षा धर्म युद्ध यात्रा देश की प्रत्येक विधानसभा तक पहुंच रही है, ताकि जनजागरण के माध्यम से गौ संरक्षण का संदेश घर-घर तक पहुंचे। उन्होंने दोहराया कि यह अभियान किसी राजनीतिक दल के प्रचार के लिए नहीं, बल्कि गौ माता के सम्मान, संरक्षण और सनातन संस्कृति के संवर्धन के लिए चलाया जा रहा है।

 

करीब एक घंटे तक श्रद्धालुओं के बीच रहे जगद्गुरु शंकराचार्य ने भक्तों से आत्मीय संवाद किया और गौ सेवा, धार्मिक मूल्यों तथा भारतीय संस्कृति की रक्षा का आह्वान किया। उनके विचारों को सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूरे समय कार्यक्रम स्थल पर डटे रहे।

 

इस अवसर पर विनय पाण्डेय, विजय तिवारी, मनोज, विपिन, अनमोल, पशुपति, पूर्व मंत्री शिवेंद्र सिंह, नवनीता पटेल, सतीश यादव, विद्यासागर, हर्ष सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन गौ संरक्षण के संकल्प और सनातन संस्कृति के जयघोष के साथ हुआ।

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