*“लाइन में जनता, ब्लैक में तेल!” — निचलौल की पेट्रोल टंकियों पर कालाबाजारी का खेल, प्रशासन पर उठे बड़े सवाल।*

Bureau Report/ Dilip Kumar Pandey /Nichlaul Correspondent /News 18 Plus  

 

रात के अंधेरे में तेल सप्लाई, दिन में ‘स्टॉक खत्म’ का बोर्ड” “100 नहीं, 200 लीटर तक पेट्रोल-डीजल ब्लैक में कौन पहुंचा रहा?”

महराजगंज जनपद की निचलौल तहसील में पेट्रोल और डीजल की कालाबाजारी को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। तहसील क्षेत्र में संचालित सात पेट्रोल पंपों में से एक चर्चित “किसान सेवा केंद्र” का वीडियो बीते दो दिनों से सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें देर रात करीब 12 बजे एक फोर व्हीलर वाहन में पेट्रोल भरते हुए दिखाया जा रहा है। वायरल वीडियो के बाद इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म है और जनता खुलकर आरोप लगा रही है कि क्षेत्र में लंबे समय से तेल की ब्लैक मार्केटिंग का संगठित खेल चल रहा है।

 

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जैसे ही पेट्रोल पंपों पर आम जनता की लंबी लाइन लगती है, उसी समय पंप कर्मचारियों द्वारा यह सूचना फैला दी जाती है कि “पेट्रोल और डीजल खत्म हो गया है।” लेकिन हैरानी की बात यह है कि कुछ ही घंटों बाद वही तेल कथित तौर पर ब्लैक में ऊंचे दामों पर बेचा जाता है। सूत्रों के अनुसार 150 रुपये से लेकर 180 रुपये प्रति लीटर तक पेट्रोल और डीजल की अवैध बिक्री की जा रही है।

 

क्षेत्र में रायपुर स्थित पेट्रोल पंप भी पहले से विवादों में रहा है। वहां आए दिन मारपीट, दबंगई और अव्यवस्था की घटनाएं सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि तेल संकट का माहौल बनाकर कृत्रिम कमी पैदा की जाती है और फिर चुनिंदा लोगों को मोटी रकम लेकर तेल उपलब्ध कराया जाता है।

 

सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिर ब्लैक मार्केटिंग करने वालों के पास 100 से 200 लीटर तक पेट्रोल और डीजल पहुंच कहां से रहा है? यदि पेट्रोल पंपों पर वास्तव में स्टॉक खत्म हो जाता है, तो फिर अवैध बिक्री के लिए इतना बड़ा भंडारण कैसे हो रहा है? क्या बिना विभागीय मिलीभगत के यह संभव है?

 

सूत्र बताते हैं कि यह खेल केवल निचलौल तक सीमित नहीं है, बल्कि महराजगंज जनपद के कई इलाकों में इसी तरह तेल की कालाबाजारी का नेटवर्क सक्रिय है। इस पूरे मामले ने जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन दोनों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता पूछ रही है कि क्या प्रशासन को इस अवैध कारोबार की जानकारी नहीं है, या फिर सब कुछ जानकर भी आंखें मूंदी जा रही हैं?

अब निगाहें जिले के नवागत जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल और डीएसओ एपी सिंह पर टिकी हैं। जनता जानना चाहती है कि वायरल वीडियो और लगातार उठ रहे आरोपों के बाद क्या जांच होगी? क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी? या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?

निचलौल की जनता अब सीधे सवाल पूछ रही है —

“आखिर जिम्मेदार कौन है? निचलौल पुलिस, आपूर्ति विभाग या पूरा जिला प्रशासन?”

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