ब्यूरो रिपोर्ट/ दिलीप कुमार पाण्डेय/ इंडो नेपाल
न्यूज 18प्लस संवाददाता
भारत-नेपाल सीमा पर मालवाहक वाहनों को लेकर हालात अब तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। नेपाल में भारतीय ट्रकों के खिलाफ बढ़ती सख्ती ने ट्रांसपोर्टरों के बीच गहरी नाराज़गी पैदा कर दी है और यह मामला धीरे-धीरे विवाद का रूप लेता दिख रहा है।
ताज़ा मामलों के अनुसार, अब जांच सिर्फ सीमित इलाकों तक नहीं रही, बल्कि लुंबिनी अंचल में प्रवेश करते ही जगह-जगह ट्रैफिक पुलिस द्वारा भारतीय ट्रकों की सघन चेकिंग की जा रही है। ड्राइवरों का आरोप है कि निर्धारित वजन सीमा से अधिक माल होने पर तुरंत कार्रवाई करते हुए भारी जुर्माना लगाया जा रहा है।बताया जा रहा है कि 14 चक्का ट्रकों में 25 टन से अधिक और 12 चक्का ट्रकों में 21 टन से अधिक वजन पाए जाने पर करीब 10,000 रुपये तक का चालान मौके पर ही काट दिया जाता है। ड्राइवरों का कहना है कि उन्हें न तो अपनी बात रखने का मौका मिलता है और न ही कोई वैकल्पिक समाधान दिया जाता है—जुर्माना जमा किए बिना आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिलती।
नेपाल सरकार द्वारा एक्सल (धुरी) के आधार पर वजन सीमा तय करना और ओवरलोडिंग पर कार्रवाई करना नियमों के तहत है, लेकिन भारतीय ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि इन नियमों का पालन चयनात्मक तरीके से किया जा रहा है और खास तौर पर भारतीय वाहनों को निशाना बनाया जा रहा है।सोशल मीडिया पर वायरल हो रही रसीदें और स्थानीय स्तर पर सामने आए दस्तावेज भी इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि अलग-अलग जगहों पर एक जैसे मामलों में अलग-अलग तरीके से जुर्माना वसूला जा रहा है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस सख्ती का असर अब भारत-नेपाल व्यापार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कई ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों ने चेतावनी दी है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो वे नेपाल के लिए माल ढुलाई कम कर सकते हैं या वैकल्पिक मार्गों का सहारा ले सकते हैं।इसी बीच, व्यापारियों और ट्रांसपोर्ट संगठनों ने भारत सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि सीमा पार व्यापार सुचारू बना रहे और ड्राइवरों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिल सके।फिलहाल, लुंबिनी अंचल में बढ़ती सख्ती ने सीमा क्षेत्र का माहौल गर्मा दिया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।