*पालिका की सरकारी भूमि पर कब्जे के आरोप की जांच को डीएम ने गठित की पांच सदस्यीय समिति!*

News 18 Plus /Bureau: Siswa Kothibhar 

 

14 डिसमिल भूमि की पैमाइश, सीमांकन और अभिलेखों की जांच करेगी टीम, 15 दिन में मांगी गई रिपोर्ट।

महराजगंज:नगर पालिका परिषद सिसवा बाजार की सार्वजनिक भूमि पर कथित अवैध कब्जे के मामले को जिलाधिकारी स्तर पर गंभीरता से लिया गया है। पालिका अध्यक्ष शकुंतला जायसवल द्वारा भेजे गए शिकायती पत्र के आधार पर जिलाधिकारी के निर्देश पर पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया गया है। समिति को अभिलेखों की जांच, स्थल निरीक्षण और आवश्यक साक्ष्य एकत्र कर 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

नगर पालिका अध्यक्ष शकुंतला जायसवाल ने जिलाधिकारी को भेजे पत्र में आरोप लगाया था कि वार्ड संख्या-21 विवेकानंद नगर (हनुमानगढ़ी) स्थित गाटा संख्या-573, रकबा 0.0570 हेक्टेयर (करीब 14 डिसमिल) श्रेणी 6-2 की सार्वजनिक भूमि है, जो नगर पालिका की संपत्ति रजिस्टर में दर्ज है। आरोप है कि रोशन मधेशिया पुत्र कमला ने तत्कालीन लेखपाल मदन गोपाल की कथित मिलीभगत से राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कर भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया। शिकायत में यह भी कहा गया कि वर्ष 2024 में तत्कालीन अधिशासी अधिकारी ने उप जिलाधिकारी निचलौल को भूमि की पैमाइश, सीमांकन, पिलर लगाने तथा अवैध कब्जा हटाने के लिए पत्र भेजा था, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। पालिका ने जिलाधिकारी से राजस्व विभाग की टीम से पैमाइश कराकर स्थायी सीमांकन एवं पिलर लगवाने की मांग की थी। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। समिति में अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) को अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि उप जिलाधिकारी निचलौल, तहसीलदार निचलौल, चकबंदी अधिकारी निचलौल तथा नगर पालिका परिषद सिसवा बाजार के अधिशासी अधिकारी को सदस्य नामित किया गया है। समिति को निर्देश दिए गए हैं कि उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण, आवश्यकतानुसार स्थलीय निरीक्षण तथा संबंधित पक्षों से जानकारी प्राप्त कर तथ्यों के आधार पर स्पष्ट आख्या 15 दिनों के भीतर जिलाधिकारी कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए।

प्रशासन द्वारा जांच समिति के गठन के बाद अब पूरे मामले पर लोगों की नजरें टिकी हैं। यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है तो सार्वजनिक भूमि पर कथित कब्जे और अभिलेखों में हेरफेर के मामले में संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है।

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