न्यूज़ 18प्लस ब्यूरो/निचलौल
बिल घटाने-बढ़ाने के खेल से निचलौल विद्युत उपकेंद्र में हड़कंप!
महराजगंज/निचलौल। निचलौल विद्युत उपकेंद्र में बिजली बिल घटाने-बढ़ाने के नाम पर कथित लेन-देन की चर्चाओं ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, लाल बिहारी के नाम से सामने आए ऑनलाइन भुगतान के स्क्रीनशॉट ने मामले को और तूल दे दिया है। बताया जा रहा है कि स्क्रीनशॉट में करीब एक लाख बीस हजार रुपये से अधिक के ऑनलाइन लेन-देन का उल्लेख है। वहीं, सूत्रों के हवाले से करीब एक लाख नब्बे हजार रुपये नकद लेन-देन की भी चर्चा है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि बिजली बिलों को घटाने-बढ़ाने के नाम पर रकम लिए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो अब तक जिम्मेदारों पर विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
छह साल से एक ही पटल पर जमे होने का आरोप
मामले में बड़े बाबू लाल बिहारी और बड़े बाबू सुरेश सिंह की तैनाती भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है। सूत्रों का दावा है कि दोनों करीब छह वर्षों से एक ही पटल पर कार्यरत हैं। लंबे समय तक एक ही संवेदनशील पटल पर तैनाती को लेकर विभागीय पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
शासकीय व्यवस्था के तहत कर्मचारियों के पटल परिवर्तन का उद्देश्य एक ही स्थान पर लंबे समय तक तैनाती से उत्पन्न होने वाली अनियमितताओं की संभावनाओं पर अंकुश लगाना है। ऐसे में यदि संबंधित कर्मचारी निर्धारित अवधि से अधिक समय से उसी पटल पर कार्यरत हैं, तो इसकी अभिलेखीय जांच कर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है।
भुगतान के स्क्रीनशॉट की जांच से खुल सकता है राज
सामने आए ऑनलाइन भुगतान के स्क्रीनशॉट और नकद लेन-देन के दावों की निष्पक्ष जांच होने पर यह स्पष्ट हो सकता है कि रकम किस उद्देश्य से ली गई और क्या उसका बिजली बिलों में किए गए किसी बदलाव से कोई संबंध है। विभागीय अभिलेखों में बिल संशोधन की जांच भी पूरे मामले की तस्वीर साफ कर सकती है।
अधीक्षण अभियंता राकेश मोहन की कार्रवाई पर निगाह
अब पूरे मामले में अधीक्षण अभियंता राकेश मोहन की कार्रवाई पर लोगों की नजर टिकी है। क्या विभाग कथित ऑनलाइन भुगतान, नकद लेन-देन और लंबे समय से एक ही पटल पर जमे कर्मचारियों की निष्पक्ष जांच कराएगा? या फिर मामला शिकायतों और चर्चाओं तक ही सीमित रह जाएगा?
उपभोक्ताओं की मांग है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर यदि आरोप सही पाए जाएं तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाए।